मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025
बजट के गजट की लपट
जब भी बजट बनता है, उसका लिखित प्रारूप होता है। इसके मौखिक और लिखित दो स्वरूप होते हैं। पहला मन-मन में बन जाता है, लेकिन दूसरा जब आता है तो उसमें से लपटे निकलने लगती है। इससे कुछ झुलसते हैं तो कुछ जल जाते हैं और कुछ भक्त प्रह्लाद की तरह लपटों से साबूत बच निकलते हैं। सब का प्रयास होता है कि वे भक्त प्रह्लाद बनें, लेकिन सभी की किस्मत ऐसी होती नहीं है। सुनने में आया है कि आजकल किस्मत लिखने के लिए भी एक्सपर्ट लोगों की सलाह ली जाती है। एक्सपर्ट तो आप समझ ही गए होंगे कि वे लोग जिन्हें जमीनी स्तर की जानकारी नहीं हो और यस सर कहने में माहिर हो। उनको निर्देशित करने के लिए उच्चतम योग्यता वाले लोगों का सहारा लिया जाता है। अब ये तो स्पष्ट ही हो गया है कि जिसकी जितनी उच्चतम योग्यता उसे जमीन का उतना कम अनुभव होना जरूरी होता है। जब अनुभव नहीं होगा तभी तो कोई यस सर करने में माहिर होगा। अनुभव अगर आ गया तो फिर वह अपनी बुद्धि का उपयोग शुरू कर देगा।
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Very nice