सोमवार, 17 फ़रवरी 2025
युवा साहित्यकारों का सोशल मीडिया सम्मेलन
मैंने इस संदर्भ को लेकर वरिष्ठ साहित्यकार मित्र को अवगत करवाया। वे खुले विचारों के थे। उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा- देखो मित्र अब नई पीढ़ी का यही साहित्य है। तुम लिखा करो कोई नहीं पढ़ता है। किसी के पास समय ही नहीं है कि तुम्हें या मुझे पढ़े। उनका स्क्रीन टाइम भी 15 सेकेण्ड का ही है। इससे ज्यादा युवा पीढ़ी के लोग इनको भी नहीं झेलते। साहित्यकार की एक रचना पढ़ने में कम से कम आधा घंटा और समझने में जीवन लग जाता है, लेकिन युवा पीढ़ी का जीवन भी इतना नहीं है कि वे जबरन में अपना समय नष्ट करें और रचनाओं को पढ़ कर उनके मर्म को समझते हुए जीवन में उतारे। आज के युवा के पास बस वही 15 से 20 सेकेण्ड का समय है, जिसमें वे हास्य, करूण और फुहड़ से भरे अर्द्ध नग्न नारियों के उघाड़े बदन को देख कर अपना मनोरंजन करते हैं। कवि सम्मेलनों में भी वे उन लोगों के लिए जाते हैं जो कविता के नाम पर चुटकुले सुना कर लोगों को उनकी तकलीफों से थोड़ी देर के लिए उन्हें दूर कर दें।
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Very nice