गुरुवार, 27 जून 2024

लीक पर्चों के टॉपर

लगभग झंझोड़ते हुए पिता ने अपने बेटे से कहा- कब तक सोए रहोगे उठो आज तुम्‍हारी परीक्षा है।
बेटे ने अलसाते हुए जवाब दिया-क्‍या पिताजी परीक्षा-परीक्षा की रट लगाए हो परीक्षा का पर्चा तो दो दिन से मोबाईल में लेकर घूम रहा हॅू। सारे उत्‍तर भी रट लिए हैं अब तो।
बेटे की बात सुन कर घबराहट में पसीने पसीने पिता का हाथ पंखे के स्‍थान पर टीवी के बटन पर चला गया। ब्रेकिंग न्‍युज में बड़े-बड़े अक्षरों में पर्चा लीक होने का लिखा होने के साथ ही एंकर लगभग गला फाड़ कर चिल्‍लाते हुए परीक्षा व्‍यवस्‍था पर सवाल दाग रही थी।
पिता को अपना जमाना याद आ गया। क्‍या समय था पीछे मुड़कर देखने पर भी परीक्षा निरीक्षक बिना किसी परवाह के कक्ष से बाहर कर दिया करते थे। परीक्षा के दिनों में नींद तो जैसे गायब ही हो जाती थी और उनका अपना बेटा निश्चिंत होकर परीक्षा के समय तक भी यह सोंच कर सोया पड़ा है कि परीक्षा के सारे सवाल उसकी जेब में हैं।
सुबह से रात तक और रातभर किताबों में आँखे गढ़ाए पिता बमुश्किल परीक्षाओं में दूसरा दर्जा पाया था और बेटे का यह आलम है कि दिनभर मटर-गश्‍ती और रात भर निश्चिंतता की नींद में कब परीक्षा का समय आ गया पता ही नहीं चला।
पिता अब तक सोंच रहे थे कि उनका बेटा होनहार है तथा लगातार परीक्षाओं में टॉप करता आ रहा है, तो उसका ज्ञान भी इतना होगा। अपनी ईमानदारी की नौकरी में पिता को समय ही नहीं मिला कि बेटे की ओर देखें तथा मॉ तो पहले ही कम पढ़ी गृहणी थी। उसे क्‍या पता परीक्षा क्‍या होती है और इसके लिए क्‍या-क्‍या जतन करना पड़ते हैं।
आज पिता की आंखे खूली तो पता चला कि बेटा प्रश्‍नों को रट कर उनके जवाब देकर हमेशा टॉप करता रहा है। जिसे अपनी सेटिंग पर इतना भरोसा था कि वह सालभर स्‍कूल कॉलेज से बंक मार पर आवारागिर्दी में व्‍यस्‍त रहता था। यही उसके आवारा दोस्‍तों के रिलेशन थे कि उसे परीक्षा से पहले ही प्रश्‍नों की जानकारी हो जाती थी और वह टॉप कर लेता था।
पिता सोंच रहे थे कि उसके बेटे जैसे कितने ऐसे और होंगे जो इस तरह परीक्षाओं में टॉप कर लेते होंगे। कितने ऐसे बच्‍चे होंगे जो निरंतर अपने ज्ञान के बल पर पढ़ने का प्रयास करते होंगे जो इनके बेटे जैसे बच्‍चों के कारण अपनी योग्‍यता होने के बाद भी वंचित रह जाते होंगे। सोंच इतनी बढ गई थी कि पिता का ब्‍लड प्रेशर हाई होने लगा था और हल्‍का सीने में भी दर्द उठने लगा था।
पिता के ब्‍लड प्रेशर और दर्द से बेपरवाह बेटा अभी भी सोया था उसे यह पता नहीं चला था कि पर्चा लीक हो चुका है और बड़े अधिकारी उसे नकार रहे हैं।
परीक्षा व्‍यवस्‍था भंग हो चुकी है, लिखने पढ़ने में बच्‍चों का बिल्‍कुल मन नहीं लग रहा है। बस इसी जुगाड़ में कि किसी तरह या तो पर्चा मिल जाए या परीक्षा कक्ष में उनकी मदद हो जाए। बस एक डिग्री की दरकार और फिर नौकरी के लिए होने वाली परीक्षाओं में भी यही जुगाड़ फार्मूला, लीक का खेल, पर्चा निरस्‍त, जांच और परिणाम में ढांक के तीन पात वाली कहावत का सिद्ध हो जाना नियति बन गई है।
योग्‍यता, मेहनत और प्रयास का स्‍थान जुगाड़ टेक्‍नोलॉजी ने ले लिया है। नतीजा बेरोजगारी और दिन-ब-दिन बिगड़ती व्‍यवस्‍था के रूप में सामने आ रहा है।
ज्‍यादातर को हॉ जी वाले युवाओं की भीड़ और मूर्खों का जमावाड़ा पसंद हो गया है, उनका ज्ञान अर्द्धनग्‍न और बदन उगाढ़ कुल्‍हे मटकाऊं रील्‍स में उलझ कर रह गया है।
पिता के माथे पर चिन्‍ता की लकीरों और मॉ के मर्म से दूर बस जुगाड़ टेक्‍नोलॉजी वाला समाज किस ओर जा रहा है, किसी को पता नहीं। आज हम सिर्फ लीक पर्चों के टॉपर को सलाम कर रहे हैं। ज्ञान की पूजा व्‍यर्थ है।                                                                                                              संजय भट्ट

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Very nice

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