सोमवार, 27 फ़रवरी 2023

गुब्‍बारा और बुलबुला

गुब्‍बारा और बुलबुला दोनों हवा के साथी है। जब तक हवा रहेगी दोनों का अस्तित्‍व रहेगा, लेकिन जैसे ही हवा विपरित हुई दोनों का वजूद खतम हो जाता है। गुब्‍बारे  में हवा भरी जाती है उसमें अपनी हवा सहने की ताकत होती है। वह अपने अन्‍दर हवा को इस तरह ढंक कर रखता है कि गुब्‍बारा तो दिखाई देता है, लेकिन इसमें भरी हवा को सि‍र्फ मेहसूस किया जाता है। गुब्‍बारे और हवा का अनोखा रिश्‍ता है। गुब्‍बारा जैसे ही बेवफा हुआ हवा निकलने लगती है। छोटा सा छेद भी उसे रास्‍ता प्रदान कर देती है। हवा कभी गुब्‍बारे के लिए वफादार नहीं होती, वह कैद होती है, इसलिए कैद से छूटने के बहाने ढूंढने लगती है। गुब्‍बारा यही सोंचता है कि हवा को अपने प्‍यार की कैद में रख ले, जिससे उसका वजूद कायम रहे, लेकिन हवा कैद से बाहर निकलने का रास्‍ता खोजती है, क्‍योंकि हवा के सारे साथी बाहर होते हैं तथा वह कुछ ही मात्रा में गुब्बारे के अंदर स‍माहित होती है। जो हवा उसकी साथी बन कर या उसकी कैद में रहकर उसका साथ देती है वह ही हवा अपना बहुमत बढ़ते देख और बाहर वालों का साथ मिलने पर गुब्‍बारे को धमाके के साथ फोड़ देती है।
जैसे ही गुब्‍बारा फटता है, उसकी आवाज चौतरफा आती है। यह हवा का कमाल होता है, लेकिन सारी बदनामी सिर्फ गुब्‍बारे पर आती है। गुब्‍बारा फट जाने पर किसी काम का नहीं होता, लेकिन वह प्रयास करता है कि हवा उसके बचे हिस्‍से में उसका साथ दे, लेकिन बहुत मुश्किल से उसे फिर से हवा का साथ मिलता है और इस गुमान में रहता है कि हवा का साथ मिल गया है तो वह फिर से अपने छोटे स्‍वरूप के साथ आगे चल जाएगा। उसे यह कतई ज्ञान नहीं होता है कि मृत शरीर में थोड़ी देर के लिए हलचल होती है और उसके बाद उस शरीर का अस्तित्‍व हमेशा के लिए समाप्‍त हो जाता है। सभी मिल कर उसके लिए रोते हैं, बिछड़ने के गम में बिलखते हैं, लेकिन वह उसे बचा नहीं पाते और खुद ही उसे आग या जमीन के हवाले कर आते हैं। हवा उसके पहले भी कई गुब्‍बारों के साथ बेवफाई कर छोड़ चुकी होती है, फिर भी पागल प्रेमी की तरह गुब्‍बारा हवा के लिए बेचैन रहता है। हवा के कई दिवाने होते हैं, लेकिन गुब्‍बारा हवा को कुछ देर ही सही अपने में समेट कर रखने की ताकत रखता है। हवा का भीतरी स्‍वरूप और बाहरी हवा से मिलने को इतना बेताब रहती है कि वह गुब्‍बारे को भी अपने साथ दूर-दूर तक उड़ाकर ले जाती है। बाहरी हवा और भीतरी हवा गुब्‍बारे को उड़ाकर ले जाती है,लेकिन फिल्‍म के हिरो की तरह गुब्‍बारे की प्रशंसा होती है, हवा को कोई पूछता तक नहीं है।
जिस हवा के सहारे गुब्‍बारा लम्‍बे समय तक रहता है, उसी हवा के सहारे और पानी पर हवा को अपने में समेट कर तैरने का हुनर सिर्फ बुलबुले के पास होता है। उसे भी बाहरी और भीतरी हवा का सहयोग मिलता है, लेकिन वह ज्‍यादा देर तक भीतरी हवा को समेटने की ताकत नहीं रखता। उसका आवरण पानी का होता है। जो हमेशा चलायमान होने के साथ ही नए-नए बुलबुलों को पैदा करने और उन्‍हें नष्‍ट करने का खेल स्‍वयं ही खेलता है। बुलबुला कभी भी फट सकता है, उसकी गुब्‍बारे जैसी आवाज भी नहीं होती और न हीं उसको अपने नष्‍ट होने का कोई दुख होता है। क्‍योंकि वह पानी से ही बनता है और पानी में ही मिल कर अपने नए वजूद को तलाशने लगता है।
कई गुब्‍बारे और बुलबुलों को हवा और पानी अपने साथ अपने दंभ के लिए पैदा करते हैं और मिट जाने पर छोड़ भी देते हैं। इस हवा और पानी के खेल को न तो गुब्‍बारों की वफादारी समझ सकती है और न ही बुलबुलों का झूठा प्‍यार ही समझ सका है। हमेशा गुब्‍बारे और बुलबुले के फटने पर उससे खेलने वालों को दुख होता है,  लेकिन कभी भी हवा और पानी को इसका कोई गम नहीं होता है। उनको पता है कि ये गुब्‍बारा फटा तो कोई दूसरा गुब्‍बारा फिर से उसे अपने में समेट लेगा और बुलबुलों को पानी फिर से  पैदा कर अपना खेल जारी रख सकता है। हवा और पानी को न तो गुब्‍बारे के फटने से दुख होता है और न ही बुलबुले के नष्‍ट होने से, लेकिन इनकी कलाओं को देखने वालों को कितनी पीड़ा होती है। यह सिर्फ उनके अलावा कोई नहीं समझ सकता है।
                                                                     -संजय भट्ट
 

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Very nice

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