शनिवार, 4 मार्च 2023
नम्बरों में खोई पहचान
इन दिनों हमारी पहचान या तो नम्बरों से होने लगी है या कागजों के टूकड़ों में फंस गई है। इन सब चक्करों में हम असली पहचान ही खो चुके हैं। पहले हमारी पहचान हमारे नाम, गौत्र, गांव, पिता के नाम और काम से होती थी, लेकिन जमाने में बदलाव के साथ ही हम लगातार हमारी पहचान नम्बरों में दस्तावेजों में उलझा कर रह गए हैं। हमारी पहचान को गोपनीय बनाने के चक्कर में हमें इतना सार्वजनिक कर दिया है कि अब हर कोई हमें अलग-अलग नम्बरों से जानता है। इन नम्बरों ने आदमी तो आदमी जमीनों तक को नहीं छोड़ा, यहां भी प्लाट नम्बर और खसरा नम्बर हो गए हैं। पुराने मोहल्ले अब वार्ड क्रमांक से पहचाने जाते हैं, गलियों के भी अपने नम्बर हो गए हैं। शुक्र है अभी नालियों को पहचान का नम्बर नहीं मिला है।
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Very nice