शुक्रवार, 10 मार्च 2023

संदेशों में समाए नोट के रंग

 

अर्थ बिना सब व्‍यर्थ है। आदिकाल से सब कुछ अर्थशास्‍त्र के बिना नहीं चल रहा है। मंहगाई के सदाबहार दौर में अब आदमी त्‍यौहारों की शुभकामनाओं में भी नोटों के रंगों को तलाशने लगा है। नोटों की लगातार गिरती साख और इनके कलरफुल स्‍वभाव ने इसे होली में रंगों से और महिला दिवस पर महिलाओं के स्‍वभाव से जोड़ दिया है।
गरमी के दिनों में खुले में सोए हुए व्‍यक्ति को काटने के लिए मच्‍छरों की जैसी होड़ होती है ठीक वैसी ही होड़ सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की होती है। इस बार एक ही दिन में दो-दो इवेन्‍ट हो जाए तो पूछो मत लगातार मोबाइल की टन-टन और टूक-टूक में दिन कब निकल जाता है समझ ही नहीं आता। दिन भर शादी के घर जैसी चहल-पहल मोबाइल पर बनी रहती है। फुरसतिए अपने-अपने कमरों की चार दिवारी में बंद होकर दिनभर मोबाइल पर बधाई संदेशों को इधर से उधर करते रहते हैं या त्‍यौहारों पर अपना ज्ञान पैलने में अपने आप को व्‍यस्‍त रखने में सफल होते हैं तथा आपको भी उनकी जमात का हिस्‍सा समझ कर सोशल मीडिया पर लगातार अपना समय काट देते हैं।
त्‍यौहारों पर मिलने वाले बधाई संदेशों का स्‍वरूप अब बदल गया है, जैसे न्‍युज चैनलो में ब्रेकिंग न्‍युज की गलाकाट प्रतियोगिता है वैसी ही प्रतियोगिता अब बधाई के संदेशों की हो चली है। सोशल मीडिया से एक लाभ यह हुआ है कि बधाई संदेश देने के लिए उस व्‍यक्ति तक जाने की जरूरत नहीं होती। घर बैठे ही कोसों दूर बैठे व्‍यक्ति को सात समन्‍दर पार भी बधाई दी जा सकती है।
सभी त्‍यौहारों के बधाई संदेशों को नोटों के रंगों से तौला जाने लगा है। होती तो शुभकामनाएं हैं, लेकिन शुभकामनाएं देने वाला व्‍यक्ति आपको आपकी गरीबी और बढ़ती हुई मंहगाई का एहसास करवाने से नहीं चुकता है। दिवाली पर नोट भेज कर यह अनुभव करवाया जाता है कि आप कितने गरीब है कि आपके पास इन नोटों के कुछ अंश तो है लेकिन गड्डिया रख पाना आपके बस में नहीं है। वहीं होली पर नोटों के रंगों से यह मेहसूस होने लगता है कि दो तीन रंगों से ज्‍यादा के नोट आपके पास नहीं है। डिजीटल युग में यह गरीबी का ताना देने की नई विधा है। घर बैठा व्‍यक्ति अपने आप में अपमानित मेहसुस कर लेता है। इस तरह सांप मर जाता है और लाठी भी नहीं टूटती। व्‍यवहार बना रहता है। अलग-अलग तरीके के एप्‍प में गुलाबी रंग के बड़े से नोट में अपनी गर्ल फ्रेण्‍ड का फोटो  गांधीजी की जगह फिट करके युवा अपनी झांकी को मण्‍डप में बदलने का सपने देखने लगता है, जबकि उसे पता भी नहीं होता है कि जिस गुलाबी नोट का वह फोटो भेज रहा है, उसे कमाने में कितना पसीना और कितने दिनों की कड़ी मेहनत लगती है।
नोटों से सजे इन बधाई और शुभकामना संदेशों से नोटों की गिरती साख का भी अनुभव होता है। लगातार घटती नोटों की साख और सामान की बढ़ती कीमतों से कमाने वाला व्‍यक्ति सदैव ही पीडि़त रहा है, लेकिन इन संदेशों में नोटों को देख कर राहत का एहसास कर लेता है। व्‍यक्ति के पास जो नहीं होता उसकी चाहत उसे हमेशा बनी रहती है और बधाई संदेशों में समाए नोटों के रंग हमेशा उसकी इस चाहत को बरकरार रखने में सफल होती है।
            - संजय भट्ट

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Very nice

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