रविवार, 26 फ़रवरी 2023
अपने वाला आदमी
वह सभी के काम आता था। किसी की भी कोई भी परेशानी हो दौड़ जाता था। हर समस्या में आगे रह कर समाधान करने का शौक था। वह सभी को अपने वाला आदमी समझता था। लोग उसकी इस बेवकुफी कहें या सज्जनता का भरपूर लाभ लेते थे। उसका नाम समाज में देवता पुरूष था, लेकिन वह ऐसा देवता था जो सिर्फ वरदान देने का काम करता था। उसकी कोई आराधना तब तक ही करता था, जब तक कि उससे काम हो, लेकिन वह इस बात को नहीं मानता था। निष्काम भाव से सभी की पीड़ा में सहयोगी बन कर सामने आ जाता था। उसके रहने मात्र के प्रभाव से लोगों की समस्याओं का समाधान हो जाता था। वह यही समझता था कि किसी का सहयोग करने से जरूरत पर उसके सहयोग के लिए इतने हाथ होंगे कि गिनती कम पड़ जाएगी। हांलाकि वह भगवान से प्रतिदिन यही मांगता था कि उसका और उसके अपने वालों का जीवन बाधा रहित हो तथा कभी किसी की मदद की जरूरत नहीं पड़े।
-संजय भट्ट
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Very nice