मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

फारवर्डिंग ऑफिसर

(संजय भट्ट)

 

ये पढ़े लिखे काममाजी लोग भी अपनी सुविधा के लिए नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। बस इन आविष्‍कारों से इनको सुविधा हो जाना चाहिए, चाहे किसी को भी कोई परेशानी हो या परेशानी बढ़ जाए। ऐसे ही कोरोना महामारी के चलते इन्‍होंने जीवन में बड़ें बदलाव किए हैं, इनमें से एक बड़ा बदलाव है- वर्क फ्राम होम। घर बैठे अभी तक ऑनलाइन सामान मिलने से लोग ठीक से परिचित भी नहीं हुए थे कि एक और नया फार्मूला सामने आ गया, घर बैठे काम। इसमें कुछ को बड़ा फायदा हुआ तो कुछ को नुकसान भी हुआ। अब सिक्‍का उछलेगा तो खड़ा तो रहेगा नहीं, किसी को फायदा तो किसी को नुकसान भी स्‍वाभाविक ही है। ऐसे ही और नया-सा शब्‍द सामने आया फावरर्डिंग ऑफिसर।
नाम तो कामकाजी लोगों का है, लेकिन लगता है किसी ऑनलाइन गैम जैसा। इस शब्‍द को अभी किसी डिक्‍शनरी में स्‍थान नहीं मिला है और राजभाषा के विभाग से मान्‍यता प्राप्‍त है, फिर भी प्रचलन में है। इस शब्‍द ने ठेठ अंतिम रूप से काम करने वालों को मुसीबत में डाला हुआ है। यह इन दिनों व्‍हाटसएप, टैलीग्राम और ई मैल जैसे गजेट्स के साथ काम कर रहा है। व्‍हाट्सएप पर तो इसका प्रभाव बहुत है। इसके कारण काम भी प्रभावित हुआ है और ऑखें भी लेकिन कौन मानता है, सभी के जुंबा पर एक शब्‍द रटा दिया गया है, मुझे व्‍हाट्सएप पर भेज दो। सुविधा के लिए इजाद किया गया यह फार्मूला यह बता कर उपयोगी बना दिया गया है कि इससे समय तथा धन की बचत होती है, लेकिन इससे कितनी मुसीबत हो जाती है, इसका किसी को भी अंदाजा नहीं है।
ऐसे ही एक लेटर चला और जहां से चला वहीं के कार्यालय में ही इसका उपयोग भी होना था, लेकिन इस फारवर्डिंग ने ऐसी आदत बिगाड़ी कि यह ठेठ नीचे के कार्यालय में पहॅुच गया, जहां इस लेटर की कोई जरूरत भी नहीं थी। अब यह फारवर्ड की बीमारी के कारण पहॅुच ही गया तो नीचे के कार्यालय वालों ने भी सोंचा इसका उपयोग नहीं है, डिलिट कर दिया जाए। बस ऐसे ही एक और नया आविष्‍कार हो गया डिलिट। ऊपर के कार्यालय वाले आदेश जारी करते, बीच वाले बिना देखे फारवर्ड करते और नीचे वाले उसे डिलिट कर देते। महत्‍वपूर्ण मामलों में भी यही होने लगा, कुछ मामलों में जांच हुई तो सामने आया कि जिसने वह आदेश बनाया था उसने पढ़ा और किसी को पता भी नहीं कि क्‍या हुआ। लेटर बनाया उसे व्‍हाट्सएप पर भेजा भी लेकिन फारवर्ड होते होते वह कब डिलिट की श्रेणी में आ गया पता भी नहीं चला। इस ऑनलाइन काम की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसमें आसानी से झूठ बोला जा सकता है और अपनी जिम्‍मेदारी से बचा जा सकता है, क्‍योंकि इसका कोई रिकार्ड नहीं होता है और रिकार्ड होता भी है तो साइबर फारेंसिक जैसी लम्‍बी जांच के बाद पता चल पता है।और अब ऐसे में रिस्‍क कौन ले सब यह सोंच कर टाल देते हैं।
इसी टालू प्रवृत्ति के चलते काम टालने की परंपरा का भी जन्‍म हो गया। बड़े ने अपने से छोटे को काम सौंपा, उसने बीच वालों को और बीच वाले ने छोटों को सौंप दिया। इसी तरह सब एक दूसरे से पूछते रहते हैं और काम काम की जगह बना रहता है। ऊपर से लेकर नीचे तक के सभी ने एक और इजाद की है, इसका नाम है- ‘’आप सभी निर्णय के लिए स्‍वतंत्र है’’ लेकिन स्‍वतंत्र कौन हुआ यह तो वह ही जानता है जो इसको कह रहा है। मामले टलते रहते और फारवर्डिंग का काम भी चल रहा है। इसके प्रभाव से बीच के काम करने वालों को अत्‍यन्‍त सुविधा हुई है और इसी के कारण इन बीच के काम करने वाले अधिकारियों का नाम फारवर्डिंग ऑफिसर हो गया है, लेकिन इनको यह नहीं भूलना है कि यहां सैर के सवा सैर मौजूद है, जिन्‍होंने फारवर्डिंग का तौड़ डिलिट के रूप में निकाल लिया है। 


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Very nice

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