संजय भट्ट
सोमवार, 6 फ़रवरी 2023
संदेह में ऋतुराज
सब कुछ बदलने का रिवाज सा चल रहा है, लेकिन ऋतुओं का बदलाव नहीं हो रहा है। वह अपने समय पर ही आ रही है। उनमें भी अब संदेह के बादल उभरने लगे हैं। हो सकता है कि आने वाले समय में इनमें भी कोई बदलाव आ जाए। सब कुछ तर्कों के सहारे चल रहा है। तर्कों में इतनी ताकत है कि वह विचारों को बदलने में पल भर भी देर नहीं करते। आज का विचार मान्यता और मनोदशा कल रहे ना रहे।
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Very nice