शनिवार, 2 दिसंबर 2023

परिणाम का एक्जिट पोल

एक्जिट पोल दो तरह के होते हैं, पहला एक्जिट पोल का परिणाम तथा दूसरा परिणाम का एक्जिट पोल। एक्जिट पोल का परिणाम विश्‍वनीय नहीं होता है, लेकिन परिणाम का एक्जिट पोल विश्‍वनीय होता है। दोनों की तासीर एक जैसी होती है, दोनों में कहीं खुशी कहीं गम का वातावरण रहता है। एक्जिट पोल का परिणाम आता है तो इसमें संभावनाओं पर चर्चा की जाती है, लेकिन हार जीत किसी की नहीं होती है। इसमें बस दो रातों की नींद उड़ जाती है, लेकिन करने के लिए कुछ नहीं होता है। जो एक्जिट पोल में हार रहा होता है वह हार को नकार देता है तथा जीत रहा होता है वह उसकी जीत की मिठाई उसके अलावा हर कोई बांट रहा होता है। परिणाम चाहे जो भी हो लेकिन एक्जिट पोल की खुशी का अपना ही मजा है। यह सब होता भी टाइम पास के लिए ही है। परिणाम का एक्जिट पोल आते ही सभी के मुगालते दूर हो जाते हैं। आजकल पढ़-लिख कर मतदाता भी इतने विद्वान हो गए हैं कि किसी को भी सही नहीं बताते। किसी एक्जिट पोल में कोई हार रहा होता है तो किसी में जीत रहा होता है। कुछ-कुछ ही ऐसे होते हैं, जो सब जगह हार रहे होते हैं, उनको पहले से ही पता होता है कि उनकी हार तय है। उन्‍हें कोई खुशी और कोई गम नहीं होता है, क्‍योंकि पहले से ही पता होता है कि हार रहे हैं। कई बार एक्जिट पोल में जीतने के बाद भी हार पक्‍की हो जाती है, जब परिणाम का एक्जिट पोल आता है। यह ठीक बच्‍चों की परीक्षा जैसा होता है, इसमें प्रश्‍नपत्र किसी का भी बिगड़ता नहीं, लेकिन परिणाम विपरित आ जाते हैं। अब तो चौकाने वाले परिणाम आने लगते हैं। परीक्षा में परिणाम परिवर्तन नकल पर भी निर्भर करता है, लेकिन चुनावों के एक्जिट पोल में नकल का कोई प्रभाव नहीं होता है। अब एक्जिट पोल का तरीका भी बदल गया है, इसमें फोन पर आप से वह सब पूछ लिया जाता है, जिसके आधार पर आंकलन करना होता है। एक्जिट पोल में विद्वानों की चांदी हो जाती है, वह विभिन्‍न स्‍थानों पर अपने अनुसार वोट शेयरिंग तथा जीत का आंकलन पिछले तथा आने वाले परिणामों पर करके अपना ज्ञान पैलते रहते हैं। उन पर कोई जिम्‍मेदारी नहीं होती है, लेकिन परीक्षा के एक्जिट पोल तथा परिणामों विश्‍लेषण इतना सही होता है कि जिम्‍मेदार पहले ही पता लगा लेते हैं कि परिणाम चौकाने वाले आने वाले हैं या उनकी इच्‍छा के अनुरूप। न तो कोई फैल होने के लिए परीक्षा देता है न ही कोई हारने के लिए चुनाव मैदान में आता है। परीक्षा का परिणाम आने तक सभी बच्‍चे पास हो रहे होते हैं तथा चुनाव का परिणाम आने तक सभी प्रत्‍याशी जीत रहे होते हैं। हार और जीत के इस खेल का परिणाम अच्‍छा खेलने के बाद भी विपरित हो सकता है। एक्जिट पोल का परिणाम चाहे जो रहा हो लेकिन परिणाम का एक्जिट पोल हमेशा अलग ही खुशी और गम का वातावरण बनाता है। इसमें जीतने वाले को सभी पूछ रहे होते हैं तो हारने वाले पीछे के दरवाजे से चुपचाप निकल जाते हैं। मानव मन भी हमेशा अपनी सफलता और असफलता को समय से पहले जानने का इच्‍छुक होता है। इसका फायदा बाजार वाले उठाते हैं, कोई सट्टा बाजार में तो चमक-दमक वाले बाजार में अपनी सफलता खोज रहा होता है। किसी को मिल भी जाती है, लेकिन क्षणिक या एक दो दिन की खुशी भी खुशी ही होती है। एक्जिट पोल भी उस घोषणा की तरह होता है, जो हजारों के लिए की जाती है, लेकिन लाभ कुछ को ही होता है। यह शुटिंग चैम्पियनशीप की तरह भी होती है, जिसमें निशाना तो पक्‍का लगाया जाता है, लेकिन ठीक किसी-किसी का ही बैठता है। कुछ भी हो लेकिन एक्जिट पोल का परिणाम, परिणामों के एक्जिट पोल से बेहतर होता है। इसमें सभी कहीं न कहीं हार रहे होते हैं तो कहीं जीत भी रहे होते हैं, लेकिन परिणामों के एक्जिट पोल में कोई एक ही जीत का सेहरा बांध कर निकलता है और शेष को पीछे का रास्‍ता ही देखना पड़ता है। इसलिए व्‍यक्ति को जीवन में हमेशा परिणामों के एक्जिट पोल पर भरोसा करना चाहिए, एक्जिट पोल के परिणाम तो कुछ भी हो सकते हैं। 
 -संजय भट्ट

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Very nice

बजट के गजट की लपट

जब भी बजट बनता है, उसका लिखित प्रारूप होता है। इसके मौखिक और लिखित दो स्‍वरूप होते हैं। पहला मन-मन में बन जाता है, लेकिन दूसरा जब आता है तो ...