पत्नियों के मोबाइल उपयोग करने के तीन तरीके मेरे शोध से समझ में आ पाए हैं। कुछ महारानी, कुछ रानी और कुछ नौकरानी स्टाईल में उपयोग करती है। नौकरानी शब्द किसी को भी पसन्द नहीं है, इसलिए इसको हमने कंवरानी शब्द दे दिया है। महारानी स्टाईल में मोबाइल का उपयोग करने वाली पत्नी को फोन लगाओ तो बच्चे ही उठाते हैं। बमुश्किल बच्चों की मम्मी से बात हो पाती है। वह रात को सोने के पहले मोबाइल को हाथ में लेती है और दिनभर की गतिविधियों को अंजाम देती है। वह डॉक्टर के लिखे इलाज की तरह सुबह, दोपहर और रात को मोबाइल का प्रयोग करती है। दिनभर इनका मोबाइल यत्र-तत्र-सर्वत्र विचरण करता है। उसके मोबाइल और उसके डाटा का उपयोग बच्चे या परिवार के अन्य सदस्य ही करते हैं। वह महारानी शैली में दिनभर का अपडेट लेती है और उस पर अपना निर्णय देती है। कई बार तो यह स्थिति उसके सामने उपस्थित हो जाती है कि उसे डाटा में शून्य ही मिलता है। वह समझ ही नहीं पाती है कि आज उसके व्हाट्सएप्प के फोटो क्यों नहीं खुल रहे। उन पर गोला क्यों घूम रहा। वह सोते हुए पति को जगाती है और पूछती महाराज आज मेरा व्हाट्सएप्प नहीं चल रहा। मेरी बहन का जन्मदिन था और उसे बधाई देना थी। फिर महाराज ऊंघते हुए से देखते हैं और सीधा सा जबाब दे देते हैं, आज दिनभर मोबाइल देखा तो अब कैसे चलेगा। चलो वायफाय से इसे कनेक्ट कर देते हैं। तब कहीं जाकर महारानी को संतोष होता है।
दूसरा प्रयोग रानी स्टाईल में होता है। रानी अपना मोबाइल अपने पास तो रखती है, लेकिन बात इनसे भी मुश्किल से हो पाती है। यह शैली मोबाइल को साइलेंट कर पर करके अपने रोज के कामों में व्यस्त रखने में माहिर होती है। इनको मोबाइल का म भी पता नहीं होता, लेकिन ये महारानी स्टाइल से थोड़ी ऊपर होती है। कभी मन किया तो मोबाइल का उपयोग कर लिया, नहीं किया तो काई लपटन साहब भी फोन करे, इनको कोई फर्क नहीं पड़ता। हां यह अपने ससुराल परिवार से ज्यादा पीहर परिवार पर ध्यान देती है और उनके सारे जवाब तुरंत देती है। इसे पता होता है कि कब किसका जन्मदिन आ रहा है, कब क्या करना है। थोड़ी सी फुर्सत का उपयोग यह मोबाइल के साथ दोस्ती में बिताती है। इनके भी कुछ डाटा का उपयोग दूसरे कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर यह कंपनी को उनका दैनिक डाटा बचा कर ही फायदा देती है। मोबाइल डाटा प्रोवाइडर कंपनियां भी इनके जैसे ग्राहकों से संतुष्ट रहता है। बस इनको रिचार्ज और चार्ज में अंतर पता नहीं होता है। इनकी बेट्री खतम हो जाती है तब ही यह चार्जिंग पर लगाती है और रिचार्ज खत्म हो जाए तो पता नहीं चलता। इनका भी रिचार्ज वाला काम इनके राजाजी को ही करना पड़ता है।
तीसरे प्रयोग की स्टाईल में हमेशा कामकाजी महिलाएं होती है। इनको सब पता होता है कि मोबाईल कैसे चलाना है, कब चलाना है, किसको जवाब देना है, किसको नहीं देना है। यह बहाने बनाने में भी एक्सपर्ट होती है। अपने कुंवर साहब को भी बेवकुफ बनाने से नहीं चुकती है। इनका दिनभर मोबाइल के साथ ही गुजरता है। इनको घर का ज्यादा पता नहीं होता है। घर में कौन क्या कर रहा है, क्या नहीं कर रहा है, बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है। वह क्या और कैसे कर रहे हैं, इससे ज्यादा इनको इनके मोबाइल की चिन्ता रहती है। मोबाइल इनका पेट जाया बच्चा होता है और बाकि सब डाउनलोड किए होते हैं। ज्यादातर तो इनका मोबाइल व्यस्त रहता है, लेकिन फिर भी कभी-कभी बात कर लेती है। यह कंवरानियां अपने कुंवर साहब को फोन लगाती है, कुंवर साहब की हिम्मत नहीं कि इनको फोन लगा ले।
ऐसा नहीं कि कंवरानी स्टाईल में मोबाइल का उपयोग करने वाली जिम्मेदार नहीं होती है, लेकिन यह जिम्मेदारी इनके मोबाइल के प्रति ही होती है। यह रोज व्हाट्सएप्प पर अपना स्टेटस बदलती रहती है, दुनिया में कब कहां क्या हो रहा है, इनको सब पता होता है, जिसे यह अपने दोस्तों से शेयर करती है, लेकिन परिवार में, घर में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी जरा कम ही रखती है। यह बड़ी ही शातिर स्टाईल है। इसमें किसी को भी एहसास नहीं होता है कि मोबाइ्ल का क्या उपयोग हो रहा है। यह महारानियों की तरह लापरवाह भी नहीं होती है। रोज सोने के पहले अपने कुंवर साहब की गतिविधियों पर भी ध्यान देती है और अपना मोबाइल रात को भी अपने सिरहाने रख कर सोती है। अब आप अंदाज लगा लो कि आपकी वाली किस स्टाईल में मोबाइल चलाती है और जो सिंगल है, उनको तो तीसरी स्टाईल वाली ही मिलेगी यह पक्का है।
- संजय भट्ट
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Very nice