शनिवार, 16 दिसंबर 2023

चूहों का बिल

 

भीषण गर्मी पड़ने लगी थी, चूहों को पता लग गया था कि अब बारिश आने का समय हो गया है। बरसात को सिर पर देख कर चूहों ने अपने ठिकाने के लिए बिल खोदना शुरू कर दिया था। सभी चूहों को रहने के लिए सुरक्षित स्‍थान की तलाश थी। सभी ने कहीं न कहीं अपना बिल खोदना शुरू कर दिया था। सब अपने-अपने बिलों में सुरक्षित अनुभव कर रहे थे। सबका ठिकाना तैयार हो गया था, लेकिन कुदरत को भी पता है, सभी को अपने मन के अनुसार स्‍थान नहीं देती। कुछ स्‍थानों पर पानी भरना शुरू हो गया था। कुछ स्‍थानों से भागने लगे थे और कुछ अभी भी अपनी मेहनत को बेकार नहीं जाने देना चाहते थे। कुछ सड़कों पर गा‍डि़यों के नीचे आकर अपना जीवन समाप्‍त कर चुके थे तो कुछ को सुरक्षित ठिकाना मिल गया था। प्रयास सभी का था,लेकिन सफलता सभी को मिले यह जरूरी नहीं होता। यही हाल सॉंपों का भी था जो चूहों  के बनाए हुए ठिकाने में अपना स्‍थान खोज लेते हैं। कुछ सड़कों पर मारे गए, कुछ युद्ध में शहीद हो गए और कुछ को ही अपना सुरक्षित स्‍थान मिल सका।
चूहों को सुरक्षित स्‍थान मिल जाए तो भी खोदने और कुतरने की आदत जाती नहीं है। कुछ जिन्‍हें गोदामों और घरों में स्‍थान मिल गया था वह अपना किला अति सुरक्षित मान रहे थे, जिन्‍हें खाने से लेकर कुतरने और रहने के लिए स्‍थान सहित सब कुछ मिल गया था। जीवन में संघर्ष कभी खत्‍म नहीं होने वाली प्रक्रिया है। सब कुछ सुरक्षित हो तो भी जीवन को बचाने के लिए हर दिन नया संघर्ष सामने आता है। गोदाम मालिकों ने अपना सामान सुरक्षित करने के लिए दवाई डालना शुरू कर दी तो घरों में चूहों के नुकसान से बचने के लिए पिंजरा लगाने लगे। फिर कुछ दवाई वाला सामान खाने से मर गए तो कुछ पिंजरों में कैद होकर घरों से बाहर कर दिए गए।
चूहों के लिए यह भी खतरनाक हो गया था। अब वे सभी सुरक्षित स्‍थान की तलाश करने लगे थे। उन्‍हें स्‍थान सुरक्षित मिलता तो खाने के लाले थे और खाना मिल जाता तो स्‍थान सुरक्षित नहीं था। ऐसे में जद्दोंजहद चल रही थी। चूहों के सरदारों ने मिल कर योजना सोंचना शुरू की। कौन कहां रहेगा यह सब तय हो गया, लेकिन परेशानियों से निपटने की जिम्‍मेदारी उन चूहों पर ही सौंप दी। कुछ चूहों ने कमाल का काम किया और सुरक्षित स्‍थान के साथ अपना खाना भी जुगाड़ लिया। उन्‍होंने तय किया था कि बरसात के चलते किसी के घर में कुतरने पर थोड़ा नियंत्रण करेंगे। खाने के लालच में नहीं फंसेंगे तो उनका भी जीवन बचने लगा।
जैसे-तैसे संघर्षों की उहापोह के बीच उनका जीवन बचने के साथ ही बरसात का समय भी समाप्‍त हो गया। जैसे ही बरसात का समय समाप्‍त हुआ खेतों में किसानों ने फसलें बो दी। अब चूहों का स्‍वर्णकाल प्रारंभ हो रहा था। वरिष्‍ठ चूहों को पता था कि उनकी रणनीति काम आई है और जिनका भी जीवन बचा है, वे सभी चूहे उनको फिर से अपना वरिष्‍ठ मान कर उनकी सेवा में तत्‍पर हो जाएंगे। उन्‍हें पुराना सम्‍मान फिर से मिलने लगेगा, लेकिन सॉंपों के भी अपने वरिष्‍ठ थे। उन्‍होंने अपनी रणनीति पहले ही बना रखी थी, जैसे ही चूहों ने खेतों के आसपास अपना ठिकाना बनाना चालू किया, साँपों ने उन पर कब्‍जा करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी। वरिष्‍ठ चूहे निश्चिंत थे, उनको पता था कि उनकी रणनीति से बचे चूहे उनके लिए  भोजन का इंतजाम कर देंगे। वे उनके बनाए बिलों में आराम करने लगे थे, लेकिन सॉंपों की रणनीति उन पर भारी पड़ गई। सॉंपों ने सबसे पहले वरिष्‍ठ चूहों को ही अपना शिकार बनाया और खतम कर दिया। वरिष्‍ठ थे, बुजूर्गियत के चलते भाग भी नहीं सकते थे। सॉंपों केआसान शिकार हो गए। अपना पेट भरनेके बाद सॉंपों ने अपनी रणनीति के तहत कनिष्‍ठ चूहों को बागडौर सौंप दी। कनिष्‍ठ चूहों ने भी सोंचा कि उनको वरिष्‍ठ का स्‍थान मिल रहा है तो खुशी-खुशी सॉंपों का सहयोग कर दिया। इस तरह बिल की लड़ाई में अपने ही वरिष्‍ठ चूहों की शहादत पर कनिष्‍ठ चूहों को स्‍थान मिल गया। 
                                                       संजय भट्ट

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Very nice

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