मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

कुछ तो लोग कहेंगे

 

जो दिखता है, वही बिकता है। किसी ने यह टेग लाइन दी और आज जमाना इसी पर चलने लगा। सब कुछ सिर्फ दिखावे के लिए हो रहा है। हर किसी को अपना सबसे अच्‍छा बताने की होड़ लग गई है। यह तो मानव स्‍वभाव रहा है कि उसे सर्वश्रेष्‍ठ करने की ललक रही है, लेकिन यह ललक पागलपन की इतनी हदें पार कर देगी कभी सोचा नहीं था। सिर्फ और सिर्फ दिखावे के लिए सब कुछ करना चाहे इसमें कुछ भी खर्चा हो या स्थिति दयनीय हो जाए। सबको पता है कि उन्‍हें अपना कमाया खाना है, लेकिन फिर भी अच्‍छा दिखने और दिखाने की होड़ में अपने आप को दांव पर लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

मैं अपने परिवार के एक शादी समारोह में बढ़ी हुई दाढ़ी के साथ पहुँच गया। कपड़े भी कुछ ऐसे नहीं पहने थे कि कोई नोटिस करे, लेकिन मैं सबके नोटिस करने का कारण बन गया। मेरी पत्‍नी से लेकर सभी का एक ही सवाल था,ऐसे कैसे आ गए। मैं आश्‍चर्य में था कि ऐसे से क्‍या मतलब हो सकता है। क्‍या मुझ में कोई कमी है। मुझ से यहां आ कर कोई गलती हो गई है। ऐसे सवालों से जुझता रहा और कार्यक्रम समाप्‍त होने तक विभिन्‍न कामों को कुशलतापूर्वक निपटाता हुआ घर पहुँचा। वही सवाल था शादी में ऐसे कैसे आ गए। मैं फिर हतप्रभ कि मैंने आखिर गुनाह क्‍या किया है। रहा नहीं गया। पत्‍नी से पूछ लिया ‘ आखिर कौन सी कमी थी, मुझमें’।छूटते ही बोली ऐसी शकल लेकर आ गए मेरी तो इज्‍जत का फालूदा ही बना दिया। मैंने भी पूछ लिया आखिर क्‍या कमी रह गई।

झल्‍लाते हुए बोली- आपसे मुंह लगना बेकार है। आपकी इज्‍जत है, समाज में सब लोग आपको मानते हैं, फिर भी ऐसे ही उठ कर चले आए। मैं अब भी हैरान था कि ऐसा क्‍या हुआ जिसकी वजह से समाज में मेरा और मेरे परिवार के साथ मेरी पत्‍नी की इज्‍जत भी दांव पर लग गई। मैंने अपना सवाल दोहराया- ऐसी कौन सी कमी रह गई, जिससे समाज को, परिवार को और तुम्‍हें नीचा देखना पड़ा। अब पत्‍नी का पारा सातवें आसमान पर था। गुस्‍से में बोली शकल देखी है अपनी कांच में। मैंने कहा देखी है, जैसा हूँ वैसा ही दिख रहा हूँ, मुझे तो कोई कमी नहीं नजर नहीं आ रही मेरी शकल में।  वो बोली यह बढ़ी हुई दाढ़ी और साधारण सा पेंट शर्ट भला कौन शादी में पहन आता है। सब को देखा था कैसे आए थे और एक तुम उठ कर चले आए।

मैंने समझाते हुए कहा- कपड़े अच्‍छे थे और दाढ़ी का क्‍या है आजकल तो फैशन में है। दूल्‍हे को भी दाढ़ी थी। उसने कहा-दूल्‍हे की दाढ़ी और तुम्‍हारी दाढ़ी में फर्क है। वह दाढ़ी को सेट करवा कर आया था और आप ऐसे ही खीचड़ी बालों वाली दाढ़ी के साथ आ गए।
अगली शादी समारोह में जाने का फिर से अवसर मिल गया। इस बार मेरे कपड़ों तथा दाढ़ी का पूर्ण ध्‍यान रखते हुए संपूर्ण नियंत्रण के सा‍थ में शादी में पहुँचा। इस बार पत्‍नी के अनुसार सुन्‍दर और मेरे अनुसार कार्टून नजर आ रहा था। शादी का कार्ड आने के बाद ही सभी कपड़ों की ट्रायल ली गई और मेरी बढ़ी हुई दाढ़ी को समय रहते कटवाया गया। सवाल सब का अब भी वही था अरे आप ऐसे होकर कैसे आ गए। फिर भौचक रह गया कि आखिर इस बार कौन सी गलती कर दी।
इस कार्यक्रम को निपटा कर जैसे ही घर पहुँचा पत्‍नी से बोला- इस बार भी सभी ने वही सवाल किया। पत्‍नी ने कहा हमेंशा ऐसे ही हर कहीं पहुँच जाते हो इस बार थोड़ा टीप टाप होकर पहुँचे तो लोग पूछेंगे ही। तब मैंने पत्‍नी को समझाया कि कुछ तो लोग कहेंगे ही। इसलिए जैसे हो वैसे रहो तो कोई सवाल का असर नहीं पड़ता। जमाने को दिखाने के लिए अपने लिए जियो।
                                                                -    संजय भट्ट

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Very nice

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