रविवार, 1 मई 2022

उनका यूं ब्लॉक हो जाना

(संजय भट्ट)

आजकल के जमाने में तकनीकी कुलांचे मार रही है। रोज कुछ नया और नया सामने आता जा रहा है। अभी मैंने श्रीमान को मोबाइल लगाने की चेष्‍टा की, मन में आया कि उनसे गपियाया जाए तो मोबाइल उठा कर उनके नम्‍बर पर उंगलियां रखे जा रहे थे, लेकिन बार-बार दो चार टूक-टूक और घंटी जाने की सूचना नहीं मिल रही थी। मैंने अपने बेटे को बुलाया और बोला जरा देखना तो श्रीमान का नम्‍बर क्‍यों नहीं लग रहा। वह तुरन्‍त समझ गया। सकपकाया हुआ सा बोला बाबूजी उन्‍होंने आपका नम्‍बर ब्‍लॉक कर दिया होगा। अब आप उनको घंटी नहीं कर पाएंगे। मेरे भी समझ में नहीं आया वे मेरी ही उम्र के और मोबाइल का नॉलेज भी मेरे जितना ही, लेकिन फिर भी इतनी बड़ी घटना को कैसे अंजाम दिया होगा।

घर भी कुछ दूरी पर था, लेकिन दोपहर का वक्‍त था और सूर्य देवता अपना क्रोध बरसा रहे थे। क्रोध तो मुझे भी आ रहा था, लेकिन सूर्य देवता के क्रोध के आगे मुझ तुच्‍छ मानव के क्रोध की क्‍या औकात ?   तमतमाता हुआ उनके घर पहुँच गया। घर में सूचना पहुँचाई तो पता च‍ला कि वो दोपहर में आराम फरमाते हैं। क्रोध का भरा हुआ घर को लौट आया। लेट कर नींद का नाटक करने चला था, लेकिन क्रोध की ज्‍वाला बाहर की धूप से कहीं अधिक तेज जल रही थी। इस जलन में नींद नहीं आई। शाम का इंतजार करने लगा, जब घूमने के लिए पार्क में जाना होता था।

शाम भी हुई, घर से समय पर निकल कर पार्क में पहुँच गया, लेकिन उनका आगमन नहीं हुआ। छटपटाहट बढ़ती ही जा रही थी। रात का आगाज होने लगा लेकिन उनका आना नहीं हुआ। अब बताओ मेरी हालत क्‍या बनी होगी, ठीक उस ब्‍वाय फ्रेण्‍ड जैसी जिसकी प्रेयसी ने मिलने का वादा किया और न आई हो। वो गुस्‍से भरा प्‍यार बढ़ता ही जा रहा था। मजबुरी भी थी कि पार्क बंद होने का समय हो गया था। अब भूख और प्‍यास ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था। मजबूरी के वशीभूत होकर घर को लौट आया, लेकिन ब्‍लॉक किए जाने का दर्द छिपाए नहीं छिप रहा था।

घर आकर बेटे को फिर से आवाज दी। बेटा जरा देख तो श्रीमान के नम्‍बर में क्‍या समस्‍या हो गई, वे आज पार्क में भी नहीं आए। क्‍या मामला हुआ है ?  बेटे ने फिर एक प्रयास किया और कहा बाबूजी रूकिए मैं अपने नम्‍बर से कॉल करता हूँ। बेटे ने अपने मोबाइल से उनका नम्‍बर लगाया तो तुरन्‍त घंटी चली गई। बेटे ने मुझे पूर्ण आश्‍वस्‍त करते हुए कहा पक्‍का है, उन्‍होंने आपको ब्‍लॉक कर दिया है। अब आप उनसे बात नहीं कर पाएंगे। फिर उसने व्‍हॉटस्‍एप्‍प की डीपी चैक की तो वह भी नहीं दिख रही थी। उनको वहां भी कोई मैसेज नहीं जा पा रहा था। हमारा ग्रुप देखा तो वहां से उनके गायब होने की सूचना मिली थी।

अब उनका इस क्रोध का कारण और भी रहस्‍यमय होता जा रहा था। मैंने बेटे से पूछा- बेटा यह ब्‍लॉक क्‍यों किया जाता है। उसने समझाया कि आप किसी से बात नहीं करना चाहे, न कोई सम्‍पर्क रखना चाहे तो उसे ब्‍लॉक कर सकते हैं। यह सुविधा मोबाइल के आने के बाद ही मिली है, इससे पहले लेण्‍डलाइन फोन पर यह सुविधा नहीं थी।

दरअसल मैं अपनी फुरसत का लाभ और उनके काम का महत्‍व नहीं समझ पाया और जब चाहे मोबाइल पर गपियाना, व्‍हाट्सएप्‍प पर मैसेज, फोटो, विडियो भेजा करता था। कई बार तो मेरा कॉल नहीं उठाने या मैसेज का जवाब समय पर नहीं दिए जाने को लेकर मैं नाराज भी हो जाया करता था। श्रीमान ने शुरूआत की और मामला वायरल होते समय नहीं लगा, सभी ने एक स्‍वर में मुझे ब्‍लॉक कर दिया था, मुझे तुरन्‍त समझ में आ गया, मेरा सामाजिक बहिष्‍कार(सोशल बॉयकाट) हो गया है। क्‍योंकि न सिर्फ सोशल साइट्स से बल्कि मेरा नम्‍बर ही लोगों के लिए परेशानी का सबब हो गया था। बेटे ने समझाया कि मोबाइल का डाटा और कॉल फ्री हो गई, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि किसी को भी बेवजह परेशान करते रहो। बात मेरी भी समझ में आ गई मैंने भी तुरन्‍त कुछ माथा खाऊ लोगों को ब्‍लॉक कर दिया। अब वे भी खुश और मैं भी मस्‍त।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   


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Very nice

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