(संजय भट्ट)
शनिवार, 26 नवंबर 2022
साहित्य और मन की बात
क्योंकि मैं साहित्यकार नहीं हॅूं और न ही मेरा कोई ऐसा वजुद है, जिसको सब पहचानते हो। बस मन की बात को संवेदना के साथ कह देता हूँ। मैं कोई मुंशी प्रेमचंद भी नहीं कि यथार्थ को कहानी की तरह लिख कर खुद को स्थापित कर लूँ। वैसे साहित्य में मन की बात का स्थान नहीं और मन की बात साहित्यिक हो यह कतई जरूरी नहीं है।
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Very nice