(संजय भट्ट)
बुधवार, 30 नवंबर 2022
उधड़ते ख्वाब
ख्वाब देखना अच्छा है, लेकिन उसको साकार करना बेहद मुश्किल है। ख्वाबों में स्वर्ग की सीढि़यों का एहसास हो जाता है, लेकिन हकीकत जब सामने आती है तो बड़ा बुरा लगता है। ख्वाबों को देखने के बाद उनको समझने की जरूरत होती है, क्योंकि अगर नहीं समझे और ख्वाबों में बहक गए तो फिर लम्बे समय तक पछताना पड़ता है। कई युवाओं को ख्वाब पालने तथा उनकों साकार करने का जुनून रहता है, लेकिन कुछ लोगों के ख्वाब हकीकत की मेहफिल में अपना स्थान बना पाते हैं। ऐसा ही उनके साथ भी हो गया। वे बैंक गए थे। उनके खाते में कुल जमा 5 हजार मे से कुछ राशि निकलवाने के लिए, लेकिन वहां से ख्वाब पाल आए और रात में वही सब उनको दिखने भी लगा।
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Very nice