रविवार, 8 जनवरी 2023
बदलती हवा का रूख
आज का मानव अपनी बुद्धि के बल पर इसे कब्जे में करना चाहता है, लेकिन इसकी सुन्दरता अपनी आजादी और खुलेपन में ही है। इसे जितना सताओगे वह उतना ही परेशान करेगी, क्योंकि यह लेने की नहीं देने की चाहत रखती है और मानव इससे लेना ही जानता है। वह इससे इतना कुछ ले चुका है, लेकिन उसके लेने की चाहत अभी भी बरकरार है। इन्सानी फितरत है, ले कर खुश हो जाता है और लौटाने की बारी आती है तो भाग जाता है।
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Very nice