शनिवार, 11 फ़रवरी 2023

पति पत्‍नी और बिजली

दो दिन से पति और पत्‍नी के बीच बोलचाल बंद थी। कारण रही बिजली, जो आजकल के जमाने में सबसे जरूरी आवश्‍यकता बन गई है और उसका कोई वैकल्पिक तोड़ भी अभी तक नहीं मिल पाया है। बात सिर्फ इतनी सी थी कि पति और पत्‍नी सुबह-सुबह अपने कामों में व्‍यस्‍त थे और बिजली चली गई। अब बिजली चली गई तो काम सारे ठप्‍प हो गए। कामकाजी व्‍यक्ति और ऐसे में बिजली चली जाए तो कितना दुख होता है, इसका अनुमान लगा पाना मुश्किल है। सुबह का समय बच्‍चों को नाश्‍ता बना कर देना, पति का टिफिन तैयार करना, ठंड के सीजन में नहाना सब कुछ तो बिजली से चलने वाली मशीनों पर आधारित हो गया है। अब बिजली नहीं तो कोई काम नहीं। काम नहीं तो समस्‍या ही समस्‍या।
जैसे ही बिजली गई, पत्‍नी ने पति से पूछा 'क्‍यों जी यह बिजली क्‍यों चली गई' पतिदेव ने भी सहज भाव से उत्‍तर दिया कि मेरी नौकरी बिजली विभाग में नहीं है। इतना सुनते ही काम प्रभावित होने से झल्‍लाई पत्‍नी ने कहा- आपको तो सीधा जवाब आता ही नहीं, कुछ भी पूछो जवाब उल्‍टा ही दोगे, मुझे क्‍या पता था, मैंने आपसे पूछा ही क्‍यों। खुद से सवाल करती पत्‍नी ने कहा-यह नहीं कि आस पड़ौस में पूछ लें,जरा पता ही कर लें कि उनके यहां भी बिजली बंद हुई है या सिर्फ अपने यहॉं ही गई है। फ्युज वायर कुछ चैक कर लें। सीधा उठा कर कह दिया कि बिजली विभाग में नौकरी नहीं है। बिजली विभाग में नौकरी होती तो भी कौन-सा तीर मार लेते। तुम्‍हारे कहने से बिजली आ जाती। पत्‍नी को गुस्‍सा इस बात पर आ रहा था कि उसने मिक्‍सर में सब्‍जी के लिए मसाले पीसने के लिए डाले थे और इधर तेल गरम होने रख दिया था।
इस समय तेल से ज्‍यादा गरम पत्‍नी का  माथा हो रहा था, क्‍योंकि टाइट शैड्युल में थोड़ी सी देर भी लम्‍बी हो जाती है। एक काम प्रभावित हो तो सारे काम प्रभावित हो जाते हैं। तभी उसने पडौस में चलते हुए मिक्‍सर की आवज सुन कर खिड़की से झांका तो बिजली को चालू देख लिया। अब पत्‍नी का गरम माथा लावा उगलने को तैयार था। लावा निकला भी लेकिन उसे क्‍या पता था यह भी फुस्‍सी बम निकलेगा। उसने पति से ईर्ष्‍या भरे भाव के साथ कहा अपने यहां बिजली बंद और पड़ौस में चालू, क्‍या हो रहा है। इस सवाल से भी पति पर कोई असर नहीं हुआ। वह ज्‍यों-का-त्‍यों बैठा रहा। अब पत्‍नी से नहीं रहा गया, उसने तुरंत पति से कहा-देखते क्‍यों नहीं हमारे यहां आखिर कब बिजली आएगी। पति ने शांत भाव त्‍याग कर उत्‍तर दिया- पड़ौसी के यहां इनवर्टर है, इसलिए बिजली चल रही है, हमारे यहां नहीं है। गुस्‍साई प‍त्‍नी का पारा तेज हो गया। आखिर हमारे यहां इनवर्टर कब आएगा, जरा सी देर हो जाएगी तो सभी मेरा ही सिर खाने लगोगे, खाना नहीं बनेगा, टिफिन नहीं बनेगा और गरम पानी के बगैर आपका नहाना भी नहीं होगा। सारे के सारे काम ठप्‍प हो जाऐंगे और ऑफिस में आप तथा स्‍कूल में बच्‍चों को देरी के लिए डांट खाना पड़ेगी।
सारा कसूर बिजली का है, लेकिन किसे समझाने जाओगे। स्‍कूल और ऑफिस में तो मेरी ही बेइज्‍जती होगी कि पत्‍नी ने समय पर काम नहीं किया और बच्‍चे स्‍कूल में तथा पति ऑफिस में देर से पहॅुचे। शांत भाव से बिजली के आने के इंतजार में बैठे पति ने घड़ी ओर नजरे घुमाई तो पता चला वास्‍तव में समय निकलता जा रहा है। पत्‍नी आधी से ज्‍यादा तैयारी रात से कर के रख देती है और सुबह जरा सी बिजली के लिए सारा काम अटक जाता है। विवादित और तनावपूर्ण स्थिति के बीच पत्‍नी ने काम नहीं करने का मन बनाया ही था कि बिजली देवी ने अपनी ऑंखे खोल दी। बिजली के पुनरागमन से सभी के चेहरों पर मुस्‍कान के भाव थे, लेकिन गुस्‍साई पत्‍नी ने फरमान जारी किया, अब बिजली की कमी का समय पूरा करने के लिए सभी को हाथ बंटाना पड़ेगा तभी काम समय पर पूरा होगा नहीं तो देर के लिए मैं जिम्‍मेदार नहीं हुँ। मदद के लिए पतिदेव किचन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पत्‍नी का दूसरा फरमान आया बिना नहाए किचन में मत जाना नहीं तो काम कम करोगे और नहाने में देरी के लिए मुझे जिम्‍मेदार ठहराओगे।
अब पति जी दुविधा में फंस गए, पहले नहाए तो भी देर और काम करवाने के बाद नहाए तो भी देर। उन्‍हें कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन समस्‍या का समाधान करने के लिए त्‍वरित निर्णय की जरूरत थी। पति ने पहले पत्‍नी की मदद को तरजीह दी, क्‍योंकि उनकी देर भले ही हो जाए, लेकिन बच्‍चे तो सही समय पर घर से निकल सकते हैं। आखिर उनका भविष्‍य उन बच्‍चों की शिक्षा से ही तो जुड़ा था। खुद डांट खा लेंगे, लेकिन बच्‍चों और उनकी मॉं का अपमान सहन नहीं कर सकेंगे। आखिरकार सबने मिल जुल कर घर में सुबह का सारा काम निपटा लिया और समय से काम हो गया तो सभी समय से अपने काम पर पहॅुच भी गए, इस सब के बीच पति को सबक मिल गया कि कोई भी काम मिल जुल कर किया जाए तो समय पर पूर्ण किया जा सकता है।

              -संजय भट्ट

2 टिप्‍पणियां:

Very nice

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