मंगलवार, 21 मार्च 2023

इंद्रदेव की टंकी का ओवर फ्लो

पहले बरसात से समय बरसात होती थी। लोग इसे इंद्रदेव की महरबानी मानते थे, लेकिन अब कभी भी बरसात हो जाती है। इसे कुछ विज्ञान के मानने वाले पर्यावरण के संरक्षक कहे जाने वाले इंसानी गलती बता रहे हैं। वैसे बरसात अपने मुड पर निर्भर है। उसका जब मन करेगा वह आएगी और उसे रोक पाने की ताकत किसी के पास नहीं है। हमारे घरों में भी पानी की टंकियां है और उनमें भी ज्‍यादा पानी आ जाता है तो ओवर फ्लो हो जाती है। कुल मिलाकर चाणक्‍य वचन लागू होता है- ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ जो ज्‍यादा है वह बाहर आएगा उसे रोक पाना मुश्किल है। चाहे फिर वह टंकी में भरा पानी हो या मस्तिष्‍क में भरा ज्ञान। कहा जाता है कि ज्ञानी पुरूष हमेशा चुप्‍पी धारण किए होते हैं, लेकिन वह जब भी बोलते हैं, अच्‍छे-अच्‍छों की बोलती बंद कर देते हैं। बस ऐसा ही कुछ इन दिनों इंद्रदेव के साथ हो रहा है। आखिर उनके यहां भी तो कुछ स्‍टोरेज की व्‍यवस्‍था होगी। जब स्‍टोरेज करने की क्षमता समाप्‍त हो जाती है तो वह ओवर फ्लो तो होगा ही। इंद्रदेव भी कितना धीरज धरते। आखिर जमीन से आते इतने पानी को समेटने की क्षमता तो उनकी टंकी में भी नहीं है, सो वह तेरा तुझको अर्पण करने वाली स्थिति में आ गए हैं।
पहले हमारे पूर्वज किसी भी प्रकार का जल ग्रहण कर लेते थे, लेकिन कम ही बीमार पड़ते थे। आज हम सभी को शुद्ध पानी की आदत हो गई है। पानी की सफाई के लिए स्‍टोरेज की टंकी को भी साफ करना होता है। यह बात इंद्रदेव तक भी पहुँच गई है। उन्‍होंने भी पानी को समय-समय पर शुद्ध करना शुरू कर दिया है। हम सड़क पर पानी बहा देते हैं। रहीमदास जी के जमाने में सावन भादौ में चलने वाली नालियां आज कचरे और गंदे पानी से अटी पड़ी है और माघ पुस में भी उसी गति से चलती रहती है। हमने सफाई पर जोर दिया तो इंद्रदेव ने भी अपनी टंकी साफ रखना शुरू कर दिया। हमारी फैलाई हुई गंदगी भी तो आखिर कहीं  जा रही है। उससे इंद्रदेव की पानी की टंकी भी गंदी होने लगी है। पानी के अपव्‍यय को रोकने के लिए मुहिम चलती है। पानी को सहेजने के लिए मुहिम चलती है, पानी को साफ सुथरा रखने के लिए मुहिम चलती है, लेकिन पालन कितने दिनों तक और कौन करता है। जैसे ही मुहिम का पखवाड़ा या सप्‍ताह समाप्‍त होता है, सब भूल जाते हैं कि पानी भी कितना कीमती है।
शौचालय से लेकर कार धोने और हर तरह की गंदगी को साफ करने के लिए पानी का ही तो उपयोग हो रहा है। और-तो-और अब पानी को बेंचा भी जाने लगा है। पहले मुफ्त में पानी पिलाने को पुण्‍य समझा जाता था, लेकिन अब पानी को बेंच कर करोड़ों का मुनाफा कमाए जाने लगा है। प्रकृति से पानी मुफ्त में मिलता है, किस्‍मतवालों के यहां कुंओं और नलकूपों में पानी की बहार आ जाती है, लेकिन जब हर वस्‍तु कमाई से जुड़ी हो तो पानी को मुफ्त में कौन देगा।
समय पर हर काम अच्‍छा लगता है, लेकिन जब भी वह असमय होता है कुछ बुरा ही होता है। हमारी छोटी सी चिन्‍ता होती है, मैं, मेरा घर और मेरा परिवार इसी में सिमट कर रह जाते हैं। इससे आगे की सोंच किसी की नहीं होती है। हम जिसे अन्‍नदाता कहते हैं, जो हमारे सुबह-शाम की भूख को शांत करने के लिए लगातार अपना पसीना बहा कर बिना मौसम की परवाह किए खेतों में अपना सब कुछ लगा देता है, उसकी चिन्‍ता सिर्फ हम तब करते हैं, जब हमें अन्‍न की आवश्‍यता होती है। ऐसा ही कुछ ऊपर बैठे भाग्‍यविधाता ने भी सोंच लिया। उन्‍होंने सोंचा कि जिसकी चिन्‍ता उसके अपने नहीं करते उसकी चिन्‍ता मैं क्‍यों करूँ। खैर किसान और इंद्रदेव का तो छत्‍तीस का आंकड़ा रहा है। उसे जब जरूरत होती है, उसको खेतों के लिए पानी नहीं मिलता और जब वह फसल समेट रहा होता है तो बरसात अवश्‍य होती है।
सारा काम सरकारी तरीके का हो गया है। हमारे पूर्वजों ने पानी के लिए बरसात के लिए जो मिन्‍नते की थी उसकी फाईलें अब खुलने लगी है। जब भी कोई बरसात की अर्जी सामने आती है, इंद्रदेव को लगता है कि इन्‍हें पानी की जरूरत है तत्‍काल बारिश हो जाती है। कई कार्टूनिश्‍ट तो मार्च का केलेण्‍डर दिखा कर बरसात रोकने की असफल कोशिश करते हैं, लेकिन बात तो ऊपर जा चुके अपने पूर्वजों की है, जिन्‍होंने बरसात के लिए मिन्‍नते की, गीत गाए और राजा-महाराजाओं ने यज्ञ करवाए। आखिर उनका पुण्‍यफल हमें ही मिलना है। हम धरती के निवासी यह नहीं समझ पाए कि ऊपर बैठे इंद्रदेव के पास कोई केलेण्‍डर नहीं है। वह तो सिर्फ अपनी टंकी की सफाई और हमारे द्वारा की गई गंदगी की सफाई के लिए बरसात कर देते हैं। उससे किसी का फायदा हो या नुकसान उन्‍हें क्‍या फर्क पड़ता है। बस इतना जरूर समझना होगा कि हम हमारे यहां पानी के स्‍टोरेज की सफाई करते समय यह नहीं सोंचते कि हमारी छत से गिरता गंदा पानी किसी को नुकसान पहुँचाएगा या नहीं, हम सिर्फ अपना फायदा सोंचते हैं ठीक उसी तरह से इंद्रदेव ने ठान लिया है, जैसे ही उनके स्‍टोरेज की क्षमता पुरी हुई वह पानी जमीन पर भेज देंगे, इससे किसी नुकसान हो या फायदा अपनी टंकी तो साफ उन्‍हें भी रखना ही होगी।

                                                                                    -संजय भट्ट

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Very nice

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