शनिवार, 29 अप्रैल 2023

संभावनाओं के पार

कहीं ये हो गया तो, नहीं हुआ तो, यह ‘तो’ का चक्‍कर कई सारे कामों को उलझा कर रख देता है। हर काम में संभावनाओं के कारण व्‍यक्ति तनाव में रहता है। उसका यह तनाव तभी जाता है जब काम पूर्ण हो जाता है। काम में जरा सी भी कमी उसे उन्‍हीं संभावनाओं को तलाशने में व्‍यस्‍त कर देती है, जो उसने पूर्व में सोंच रखी थी। काम का क्‍या है कभी खतम होता ही नहीं और रोज के काम में संभावनाओं का बना रहना मजबूरी होती है। यही संभावनाएं व्‍यक्ति के काम में उसके आत्‍मविश्‍वास को कम करती है।
जब वह अच्‍छा काम करता है तो पॉजिटिव सोंचता है, लेकिन नकारात्‍मकता आ ही जाती है। यही नकारात्‍मकता उसके आत्‍मविश्‍वास को कमजोर कर काम को बिगाड़ने में मददगार सिद्ध हो जाती है। जिसके पास जितनी संभावनाएं होती है, उसका काम से आत्‍मविश्‍वास उतना ही कम होता जाता है। संभावनाओं की तलाश में काम को सुधारने की संभावनाएं कम और काम बिगाड़ने की संभावनाएं ज्‍यादा होती है। मनुष्‍य के पास दिमाग होना उसका जितना मित्र है, उतना ही शत्रु भी है। बाहर के शत्रुओं से निपटना आसान होता है, लेकिन मन के बनाए शत्रु से निपटना बहुत ही मुश्किल काम होता है। काम सामने आते ही सवालों का पिटारा खुल जाता है। ये कैसे होगा, कौन करेगा, कैसे करेगा, किसकी मदद मिलेगी, नहीं मिलेगी जैसे कई सवाल काम के साथ उभरने लगते हैं। एक बार किया हुआ काम भी दोबारा सामने आता है तो विचार आने लगता है, तब उस व्‍यक्ति ने मदद की थी, अब वह नहीं है, तो कौन करेगा, नया व्‍यक्ति काम को लेकर इतना जागरूक है कि नहीं वह कैसे करेगा, थोड़ा भी वह नया व्‍यक्ति पुराने किए हुए काम में अपना नया स्‍टाईल लाता है तो उसे रोक दिया जाता है। पुरानों की तलाश की जाती है, अनुभवी को ढूंढा जाता है, कार्य की पूर्णता ही व्‍यक्ति के आत्‍मविश्‍वास के स्‍तर को बढ़ाती है।
जितनी खुशी काम के पूर्ण होने पर होती है, उससे कहीं ज्‍यादा टेंशन काम के दौरान होती है। उस काम में थोड़ी सी भी मीन-मेख किसी ने निकाल दी तो फिर उस काम करने वाले व्‍यक्ति के मन में संभावनाओं के बादल उमड़ने लगते हैं। जो व्‍यक्ति जितना ज्‍यादा काम को गंभीरता से लेता है उसका उतना ही टेंशन रहता है। जब तक आत्‍मविश्‍वास नहीं आता काम में कमी की संभावनाएं बनी रहती है। पहले एक काम बिगड़ता है तो दूसरा भी बिगड़ने को तैयार हो जाता है। जिन्‍दगी की पटरी पर कई सारी तो की संभावनाओं का आवागमन होता रहता है, जब तक तो से निजात नहीं मिलती तब तक काम के बिगड़ने की सारी व्‍यवस्‍थाएं बनी रहती है। जिन्‍दगी हो, ऑफिस हो या फिर व्‍यापार हो जब तक सफलता नहीं मिल जाती तब तक असफलताओं की संभावना बनी रहती है। ऑफिस में काम को टाल सकते हो, किसी से मदद ले सकते हो, जिन्‍दगी और व्‍यापार में खुद पर निर्भरता र‍हती है। जब तक खुद किसी रिस्‍क को लेकर काम नहीं करते तब तक उस काम में सफलता नहीं मिलती है।
इस मामले में पुराने खिलाडि़यों का भी अपना रूतबा रहता है, वे काम को आसान बनाने के स्‍थान पर बिगाड़ने की तकनीकों पर ज्‍यादा विश्‍वास करते हैं, जिससे उनकी अहमियत बनी रहे। सभी को लगे कि यह काम तो उन्‍हीं के बस का है और कोई तो कर ही नहीं सकता है। ज्‍यादातर ऑफिसों में इस तरह का कल्‍चर र‍हता है। जब भी कोई नया खिला‍ड़ी मैदान में आता है तो उसकी योग्‍यताओं को परखने के लिए ऐसे ही बिगड़े काम दिए जाते हैं। कुछ लोगों को बिगड़े काम सुधारने में माहरत हांसिल होती है। पुराने खि‍लाड़ी इसी में लगे रहते हैं कि यह सफल नहीं होना चाहिए नहीं तो उनका पत्‍ता कट हो जाएगा और नया खिलाड़ी जम जाएगा। पुराने जमे जमाए लोग अपनी दुकान चौपट होने के डर से नए लोगों को मदद नहीं करते हैं, फिर भी सफल हो जाए तो उसको अपनी सफलता के किस्‍से सुनाते हैं। कुछ नए लोग योग्‍यता की परख में इसलिए भी फैल हो जाना पसन्‍द करते हैं कि उनको लगता है, यह काम सफल हो गया तो सभी कामों का टोकरा उनके माथे पर रख दिया जाएगा। वे जानबुझ कर संभावित ‘तो’ को खड़ा करते हैं और उसी में काम को उलझा कर पुराने लोगों के मत्‍थे मढ़ देने में सफल हो जाते हैं।
सभी को पता होता है कि संभावनाओं के पार सफलता है, लेकिन फिर भी नकारात्‍मक संभावनाओं में उलझे  रहते हैं या उलझाने में सफल हो जाते हैं। यह भी पता होता है कि पहला काम बिगड़ जाने पर दूसरा नहीं मिलेगा, इसलिए कुछ तो जानबुझ कर काम को बिगाड़ने में अपनी शान समझते हैं और किस्‍से सुनाते हैं कि वह काम तो आसान था, लेकिन मैंने ऐसा उलझाया कि आजतक नहीं हो पाया। ऑफिस में व्‍यक्तियों की पहचान ही दो तरीके से होती है। एक काम को सुधारने वाले तथा दूसरे काम को बिगाड़ने वाले। काम को बिगाड़ने वाले इज्‍जत गंवा कर भी सुखी रहते हैं और काम को सुधारनेवाले हमेंशा कामों से लदे रहते हैं।                                                                          -संजय भट्ट

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Very nice

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