शनिवार, 29 अप्रैल 2023
संभावनाओं के पार
कहीं ये हो गया तो, नहीं हुआ तो, यह ‘तो’ का चक्कर कई सारे कामों को उलझा कर रख देता है। हर काम में संभावनाओं के कारण व्यक्ति तनाव में रहता है। उसका यह तनाव तभी जाता है जब काम पूर्ण हो जाता है। काम में जरा सी भी कमी उसे उन्हीं संभावनाओं को तलाशने में व्यस्त कर देती है, जो उसने पूर्व में सोंच रखी थी। काम का क्या है कभी खतम होता ही नहीं और रोज के काम में संभावनाओं का बना रहना मजबूरी होती है। यही संभावनाएं व्यक्ति के काम में उसके आत्मविश्वास को कम करती है।
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Very nice