शनिवार, 6 मई 2023

परेशानी के सलाहकार

 

भले ही खुद की परेशानी का हल नहीं हो, लेकिन दूसरों की परेशानी के सभी समाधान उनके पास होते हैं। जब खुद परेशान होते हैं तो कोई रास्‍ता नहीं निकलता जैसे ही दूसरे ने किसी ने अपनी परेशानी को सामने रखा तुरन्‍त कई सारे समाधान सामने आ जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि जब खुद परेशान होते हैं तो उसकी सारी कमियां ही सामने आती है, लेकिन जब दूसरे की परेशानी का पता चलता है तो सुझावों के ढेर लग जाते हैं। कैसे हल करना है, कौन मदद कर सकता है, मदद कहां से लेना है, क्‍या करना होगा सब कुछ ऐसा सामने रखते हैं, जैसे खुद इस परेशानी से जुझ चुके हों। सैकड़ों उदाहरण दूसरों के दे देंगे, कभी अपनी बात नहीं करेंगे। ऐसे परेशानी के सलाहकारों ने आजकल दुकानें भी खोल ली है, वे लोगों को परेशानियों के हल ऐसे बताते हैं, जैसे उनकी आप बीती हो। लोग भी उनमें ज्‍यादातर युवा जो उनकी बातों को सुन कर तालियां बजाते हैं और ठहाका लगा कर हंसते हैं।
वही युवा जिसे अपने माता-पिता, दादा-दादी की बात समझ नहीं आती, आती भी है तो बुरा लगता है कि मुझे ही क्‍यों टोंकते रहते हैं, इनके पास कोई काम नहीं है। अपने परिजनों के अनुभवों से सीखने के स्‍थान पर ऐसी दुकानों पर जाते हैं और उनके घटिया प्रोडक्‍ट को भी ऐसे खरीदते हैं, जैसे इसी से उनकी अगली कमाई होने वाली है। हर आदमी की अपने परेशानी है और कोई भी ऐसा अछूता नहीं है,जिसे कोई परेशानी नहीं हो। हम सर्वे भवन्‍तु सुखिन: की बात जरूर करते हैं, लेकिन सुखी व्‍यक्ति कौन है, कहां मिलेगा, किसी को पता नहीं है। वह दुकानदार जो दूसरों को उनकी परेशानियों के हल बताने का धंधा खोल कर बैठा है, उसे भी कोई-न-कोई परेशानी है, लेकिन मजबूरी यह है कि वह किसी से बयां नहीं कर सकता। मामला धंधे से जो जुड़ा है। यदि वह अपनी परेशानी किसी के सामने रख दे तो उसके धंधे पर असर पड़ जाएगा। सभी को पता चल जाएगा कि उसे भी परेशानी है।
कुछ लोग तो परेशानियों से इतने परेशान हो जाते हैं कि उनको कोई हल ही नहीं मिलता। जब हल नहीं मिलता तो वे अवसाद (डिप्रेशन) में चले जाते हैं। किसी से बात नहीं करना और कोई बात किसी के सामने नहीं रखना, उन्‍हें लगने लगता है कि उनकी परेशानी इतनी अनोखी है कि उनसे पहले किसी के सामने आई ही नहीं होगी। घूटन भरे माहौल में वे सभी से दूर होने लगते हैं और यही दूरियां उनकी परेशानी को ज्‍यादा बढ़ा देती है। जब हम परेशान होते हैं, उसका मूल कारण यह है कि हम जैसा चाहते हैं वह वैसा नहीं हो कर दूसरे तरीके से हो रहा होता है। इससे लगने लगता है कि वह नहीं कर पा रहे हैं और यही परेशानी का कारण बन जाता है। आम आदमी की परेशानी यही है कि वह जो चाहता है,वह उसे हांसिल नहीं हो रहा है और कोई दूसरा वही कार्य आसानी से कर रहा होता है।
लोगों को लगता है कि वह सबसे बड़े योग्‍य है और उनकी योग्‍यता का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। जब ऐसा लगता है तो परेशानी हो जाती है। जब परेशानी होती है तो रास्‍ते अपने-आप बन्‍द होने लगते हैं,क्‍योंकि दिमाग में ऐसे विचार ही नहीं आते हैं कि किसी से सीखा जाए, किसी के पास के जाया जाए और उनसे अपनी बात बता कर उसका समाधान तलाश किया जाए। वास्‍तविकता भी कुछ ऐसी ही है, जिसके पास समाधान की तलाश की जाती है वह खुद किसी-न-किसी परेशानी का सामना कर रहा होता है। हर व्‍यक्ति का स्‍वाभाविक गुण है कि उसे दूसरे थाली में घी ज्‍यादा ही दिखाई देता है। जब तक स्‍वयं की थाली में ध्‍यान नहीं देगा दूसरों की थाली में घी ज्‍यादा ही दिखाई देगा। कोई भी अपने आप को कमजोर मानने को तैयार नहीं होता है, यह भूल जाता है कि पांचों ऊंगलियां समान नहीं होती और जब तक पांचों नहीं मिलती कोई भी काम सफल नहीं होता है। लेकिन लोग हमेशा टेढ़ी ऊंगली का उपयोग कर ही घी निकालने का प्रयास करते हैं। उन्‍होंने पढ़ा होता है कि घी टेढ़ी ऊंगली से ही निकलता है, जबकि सच्‍चाई यह है कि घी में ऊंगली डालों तो ज्‍यादा नहीं तो अपनी जरूरत के मुताबिक घी तो निकल ही आता है।
हर आदमी जिद, ज्‍यादा और जल्‍दी के चक्‍कर में वह सब गवां बैठता है, जो उसे समय से मिल जाता है। पढ़ा तो उसने यह भी होता है समय से पहले कुछ नहीं मिलता, लेकिन यह उसके पक्ष की बात नहीं होती है इसलिए वह इंतजार नहीं करता है। जब इंतजार और संतोष नाम के दो गुण व्‍यक्ति के जीवन में आ जाते हैं तो वह कई तरह की परेशानियों से स्‍वयं को मुक्‍त कर लेता है। खुद को तलाश करने का समय किसी के पास नहीं है, हमेशा वह खुद को दूसरे से तुलना कर समझना चाहता है, लेकिन कभी खुद की तुलना अपने आप से नहीं करता है।
होता भी यही है। वह देखो शर्मा जी की लड़की ने टॉप किया है और तुम उससे आधे नम्‍बर भी नहीं ला सके। यहीं से शुरूआत हो जाती है दूसरों से तुलना करने का मामला। जब तक अपनी तुलना आप से नहीं करोगे, अपनी कमजोरियों को नहीं पहचान पाओगे और जब तक खुद की कमजोरियां पता नहीं होगी, उन्‍हें दूर नहीं किया जा सकता है। जब तक ऐसा होगा तब तक परेशानियों के सलाहकार और उनकी दुकाने फलती फूलती रहेगी और हर आदमी परेशानी का समाधान दूसरों में ढूंढता रहेगा।
-         संजय भट्ट

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Very nice

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