रविवार, 7 मई 2023
डूबते भविष्य के संस्कार
नौकरी में आकर ईमानदारी से काम शुरू किया था, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई उसे अपने भविष्य की चिन्ता सताने लगी। नौकरी की शुरूआत में विवाह नहीं हुआ था, तो जिम्मेदारियों का बोझ भी कम था। पिता भी सेवा में थे तो इतनी परेशानी नहीं हुई। घर का काम अच्छे से चल रहा था, लेकिन अब जब बच्चे बड़े होने लगे थे, घर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ भी आने लगा था और पिता भी सेवा से निवृत्त हो चुके थे। ऐसी परिस्थिति में उसका मन डावाडोल होने लगा था। कुछ स्वास्थ्यगत परेशानियों ने भी उसे घेरना शुरू कर दिया था। उसके अपने काम में महारत भी होने लगी थी। बदलते स्थानों पर उसके लोगों से सम्बन्ध भी बढ़ने लगे थे और समझ भी विकसित हो गई थी। वह न चाह कर भी अब वह नहीं कर पा रहा था, जो वह करना चाहता था। नौकरी की शुरूआत में उसके मन में सेवा का भाव था, लेकिन जैसे-जैसे समय और जिम्मेदारियों के बोझ में वेतन कम लगने लगा, उसका विचार बदलता गया।
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Very nice