मंगलवार, 31 जनवरी 2023
आर्टिफिशल जिन्दगी
जमाना लगातार बदल रहा है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और व्यवहारिक हर तरीके से बदलाव देखा जा रहा है। इस बदलाव के दौर में कुछ भी ऑरिजनल नहीं रहा। सब कुछ आर्टिफिशल होता जा रहा है। महिलाओं को गहनों से बहुत लगाव होता है, लेकिन यहां भी सोने-चांदी की जगह आर्टिफिशल ऑर्नामेन्ट ने अपना जो स्थान बनाया है वह ऑरिजनल को कहीं पीछे छोड़ देता है। धीरे-धीरे ही सही लेकिन सब कुछ आर्टिफिशल होता जा रहा है। समाज में रिश्ते भी होते थे, लेकिन मनचाहे जीवन साथी की तलाश में मॉ-बाप को छोड़ कर कोई रिश्ता ऑरिजनल नहीं रहा, जिसे निभाया जा रहा हो। सारे रिश्तों में गहनों की तरह ही आर्टिफिशल का महत्व बढ़ गया है। समाज भी आर्टिफिशल की ओर इतना आकर्षित है कि ऑरिजनलिटी लुप्त ही होती जा रही है। अब तो प्यार की प्यास में अपने महत्व को प्रतिपादित करने के लिए माता-पिता का रिश्ता भी अपनी मौलिकता से बाहर आ गया है। दिखावे के प्रचलन ने सारी मौलिकता समाप्त कर आर्टिफिशल को स्थान देना शुरू कर दिया है। हजारों किलोमीटर की दूरी पर बैठा फेसबुक मित्र घर परिवार के ऑरिनल रिश्ते से ऊपर हो गया है।
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Nice sir
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंवाकई भावनात्मक रूप से शून्यता तो आईं है,यह बहुत दुखद है
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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